राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित एक हिन्दी सेवी संस्था है जिसकी स्थापना सन् १९३६ ई. में हुई। इसके संस्थापकों में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन, पं. जवाहरलाल नेहरू, श्री सुभाषचन्द्र बोस, आचार्य नरेन्द्र देव, आचार्य काका कालेलकर, सेठ जमनालाल बजाज, बाबा राघवदास, श्री शंकरदेव, पं. माखनलाल चतुर्वेदी, श्री हरिहर शर्मा, पं. वियोगी हरि, श्री नाथसिंह, श्री श्रीमन्नारायण अग्रवाल, बृजलाल बियाणी एवं श्री नर्मदाप्रसाद सिंह प्रमुख थे।
समिति की भारत के विभिन्न प्रदेशों में २५ से अधिक राज्य इकाइयाँ हैं और भारत के बाहर बीस देशों में उसकी शाखाएँ हैं। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, के सुझाव के आधार पर ही १४ सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
विश्वभर हिन्दी का प्रचार एवं प्रसार हो, इस लक्ष्य के साथ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति एक स्वंय-संचालित संस्था के रूप में प्रतिस्थापित हुई, जिसका नाम 'राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ज्ञान मंडल' है। इस मंडल द्वारा दूररवर्त शिक्षा के अन्तर्गत विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम को प्रस्तावित करता है।
राष्ट्रभाषा हिंदी (वर्धा) द्वारा आयोजित राष्ट्रभाषा हिंदी की प्राथमिक परीक्षा का आयोजन सेविंग ड्रीम्ज फाउंडेशन में किया गया। फाउंडेशन के २५ विद्यार्थियों ने उत्साह से परीक्षा में हिस्सा लिया। विद्यार्थियों की प्राथमिक परीक्षा ली गई ।